FacebookGoogleYoutubeTwitter
गोडवाड़ मे जैन धार्मिक पर्यटन- गोडवाड़ के पंचतीर्थ PDF Print E-mail
  • गोडवाड़ का गौरव: राणकपुर तीर्थ - राजस्थान राज्य के पाली जिले में गोडवाड़ पंचतीर्थी का भव्य तीर्थ राणकपुर विश्वविख्यात धरणाशाह के वंशज द्वारा 14-15वीं शताब्दी का शिल्प वैभव, दर्शनीय अनोखा अनूठा, आश्चर्यमय विमानरूप में 50,000 वर्ग फीट में तिमंजिला 1444 खंभों पर आधारित प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का जिनबिम्बों युक्त आचार्य सोमसुन्दरसुरिजी की प्रेरणा से धरणा व रत्ना पोरवाल वि.सं. 1433 नींव कहावत ‘गोडवाड़’ की राणकपुर की टांकी तो दिन-रात चले। कभी निर्माण कार्य पूरा (रूका) नहीं। नलिनी गुल्म जैसा देव विमान पर्यटकों के लिए जादुई ‘करिश्मा’ नजर आता है। पर्यटन कह उठते है गोडवाड़ में स्वर्ग यहीं है। इसके 24 मंडप 54 देवकुलिकाएं, एकरूपता मय निर्माण प्रत्येक द्वार पर संभा मंडप व मेघनाद मंडप, तोरणद्वार, लम्बी कतारें, चिता आकर्षण मन एकटक बस निहारने रहता है।
  • सूर्य मंदिर राणकपुर - राजस्थान में सूर्य मंदिर इने गिने ही है। गोडवाड़ परगने का राणकपुर निर्माण पूर्व की स्थापत्य कला का श्रेष्ठम उदाहरण प्रस्तुत करता है। पूर्वाभिमुख, ग्वाक्ष, इसकी स्थापना छठी शताब्दी पूर्व के इर्दगिर्द मानी जा सकती है। इसका जीर्णोद्धार 14वीं शताब्दी के आसपास राणा कुंभा द्वारा करवाये जाना जाता है। स्थापत्य कला 14 सभा मंडप व रंग मंडप का वास्तुशास्त्र को बेजोड़ उदाहरण प्रस्तुत होता है कि सूर्योदय की प्रथम किरण गर्भगृह की मूल प्रतिमा पर आती है। मंदिर के दक्षिण भाग में मघई नदी का कल-कल, छल-छल बहना प्रकृति की हरियाली, बांसों के झूरमूट में पर्यटकों को जादुई नशा छा जाता है। तट पर भीड़ मंडरा जाती है।
  • मूछाला महावीर तीर्थ - घाणेराव की राजधानी से लगभग 5 किमी. दूर अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच चौबीस जिनालय वाला मूछाला महावीर का मंदिर अतिप्राचीन है। इतिहासकार डॉ. भंवरसिंह राठौड़ के अनुसार सम्प्रति काल में मंदिर स्थापना के अंतर्गत इस मंदिर का निर्माण हुआ था। तत्पश्चात मूछाला मालदेव चित्तौड़ शासक के समय अल्लाउद्दीन खिलजी के समय से यहां प्राचीन गढ़ सोनगढ़ को ध्वस्थ कर दिया गया था। केवल जलकुंड़ और अनुबिनय से कुछ मंदिर का भाग ध्वस्थ कर बाकी रहने दिया गया। पंचतीर्थ में प्रमुख एवं पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है।
  • सादड़ी - 11 जैन मंदिर पर्यटन के मंदिर अपनी शोभा कला संस्कृति में विशेष स्थान है। पर्यटक, धर्मप्रेमियों का तांता लगा ही रहता है। राजपुरा गांव में परशुराम रोड़ पर शांतिनाथ का प्राचीन मंदिर जैन धर्म संस्कृति का गौरवमय धार्मिक पर्यटकों को मोहित करता है। मूछाला महावीर घाणेराव 11 जैन मंदिर घाणेराव के एवं 2000 वर्ष पुराना सोनसिंघ द्वारा निर्मित यह मंदिर किसी जमाने में सोनगढ़ के नाम से जाना जाता था जो आक्रमणकारियों से धूल धूसरित हो गया। आज भी यह मंदिर कला, शिल्प, पर्यटकों धार्मिक अनुष्ठान जैनाचार्यों के विहार का इस अरावली आंचल में नवजीवन चरितार्थ करता है। नारलाई के 21 जैन मंदिर जो पंचतीर्थ के गांवों में इस गांव का आकर्षण है। इसी प्रकार वरकाणा पार्श्वनाथ बावन जिनालय बिजोवा, रानी गांव, दादाई, बाली में आदिश्वर, फालना गांव, फालना स्टेशन पर स्वर्ण नया मंदिर, सेसली, सेवाड़ी शांतिनाथजी 52 जिनालय, राता महावीर संभवनाथ, नाणा, दियाणा, नांदिया, जीवित स्वामी वांदिया। 2000 वर्ष पूर्व नन्दीश्वर द्वीप का पाषाण यह कलात्मक है लहराता समुन्द्र पट्ट का धार्मिक अंकन पर्यटकों को लुभाता है। खुडाला धर्मनाथ भगवान की श्वेत पद्मासन प्रतिमा चमत्कारपूर्ण, खीमेल श्री शांतिनाथजी भगवान प्रतिमा दूसरा बावन जिनालय, विशाल धार्मिक बावड़ी धर्म का केन्द्र है। सांडेराव  का शांतिनाथजी मंदिर (देवविमान) पांडवों के वंशज गंधवसेन द्वारा निर्मित है।
  • तेरापंथ के तीर्थ- कंटालिया, सिरयारी भी संत भिक्षु का निर्वाण होने से धार्मिक जाने माने तीर्थ स्थान बन गये है। जहां प्रतिवर्ष लाखों धार्मिक प्रियजनों का जमावड़ा होता है।
 

आपको हमारी संस्था का कार्य कैसा लगा ?






 

Who's Online

We have 17 guests online

ऐतिहासिक हिन्दी मासिक पत्रिका

1970 ई. से गोडवाड़ विरासत ने अपनी मातृभूमि गोडवाड़ के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक का वारिस गोडवाड़ के लिए तत्परता निभाई। अब इसे नियमित रूप से मासिक प्रकाशन करते हुए देश के कोने-कोने में बस रहे गोडवाड़ मारवाड़ के महानुभावों तक इस पत्रिका को पहुंचाया जा रहा है।

गोडवाड़ - धार्मिक पर्यटन का पथ

गोडवाड़ प्रदेश में इतने अधिक तीर्थस्थल है ऐसा लगता है जैसे सभी देवताओं का आर्शीवाद इस भू-भाग को ही प्राप्त है। धन्य हैं यहां के वाशिंदे जहाँ प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण प्रेम न्यौछावर कर दिया और देवता भी इस पवित्र धरती का गुणगान करते है और इस धरती पर जन्म लेने के लिए लालायित हैं।

Photos of Godwad Virasat

image1
Lorem ipsum dolor sit amet
image1
Lorem ipsum dolor sit amet
image1
Lorem ipsum dolor sit amet
image1
Lorem ipsum dolor sit amet

सम्पर्क करें

गोडवाड़ विरासत

हनुमान कालोनी, राणकपुर रोड़, सादड़ी 
तहसील-देसूरी, जिला-पाली (राज.) 306702
फोन - 02934-285135,
मो.- 9928999157, 8104747425, 9636580669

Email- info@godwadvirasat.org
Web: www.godwadvirasat.org

S5 Box