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गोडवाड़ - धार्मिक पर्यटन का पथ PDF Print E-mail

गोडवाड़ - धार्मिक पर्यटन का पथ

 

गोडवाड़ रै गोडवाड़ में, तू अेकर पाछौ आज्या रै।

खेतला, राणपुर रै, किलकारया कर ऊपर चढता।।

मेला खेलां मौज मनाता, होड़ां होड़ दौड़ लगाता।

कदै नाचता कदै कूदता, देखण  रौ रंग जमाता, तू अेकर पाछौ आज्या रै।


गोडवाड़ नाम अपने आप में शिवलिंग की तरह शिवमय है, मूलाधार, रक्षार्थ कवच की तरह अभिमंत्रित मंगलमय सुरक्षा का प्रतिक, प्रभातमय अरावली आंचल में अरूण मुर्गे की बाग से सप्तशत जनपद में जागृत का स्वर प्रतिदिन उच्चारित करना ध्वल स्निग्ध सरिता की कलकल से अवगाहन कर नवसन्देश देता है। इसका रक्ताभ वीरता, श्वेत शांति  एवं श्वेतक्रांति मां सरस्वती ज्ञान का परिधान द्योतक है। इस संधि स्थल, जिससे पूरे राजस्थान के हृदय स्थल की कहे तो अत्युक्ति नहीं है।

  • श्रद्धा, भक्ति आस्था स्थल : नीम्बों का नाथ- साण्डेराव से 5 किमी. दूर शिव-पार्वती मूर्ति एवं शिव लिगांकार के रूप में दर्शनीय है। इस स्थान की महता पांडव काल से जानी जाती है। पांडवों द्वारा बावड़ी एवं नवदुर्गा मंदिर अन्य 15 मंदिर, गंगाबेरी प्राचीनतम स्थल है। इतिहासकार डॉ. भंवरसिंह राठौड़ ने तथ्यों को प्रकट किया कि यह स्थान वर्षों तक सूना पड़ा रहा, बालू रेत के टीलों में दब गया था।  16वीं शताब्दी में महाराणा के अनुज द्वारा धार्मिक भावनाओं से नीम्बा रेबारी की भक्ति से खेजड़ी से मूर्ति का निकलना एवं प्रकट होना महत्वपूर्ण रहा है। प्रतिवर्ष वैशाखी पूर्णिमा व शिवरात्रि को मेला भरता है। पर्यटकों का बारह मास भीड़ लगी रहती है। इसके विशेषकर ट्रस्ट के धार्मिक विचारों वाले ठा. जगतसिंह राणावत के समय में इस मंदिर का कार्य प्रशंसनीय एवं महत्वपूर्ण बनने से भारत भर के सभी वर्ग के  श्रद्धालु एवं रेबारी जाति के लोग आराध्य रूप में मानते हुए आते है। यह गोडवाड़ का सांस्कृतिक स्थल है।
  • देवों के देव : श्री परशुराम महादेव- यह सादड़ी से 10 किमी. पूर्व की ओर प्राकृतिक स्थल जो वि.सं. 1439 खेता चित्तौड़ शासक जिसका उत्तराधिकार लाखा था। भाग विभाजित होकर मेदपाट में हो गया। परशुराम बगेची परशुराम धर्मशालाएं एवं यात्रियों के लिए सुलभ तारकोल मार्ग की पूर्ण व्यवस्था है। सन् 1970 के बाद विकसित आधुनिकरण एवं मेले पर तीन-चार लाख पर्यटक देशी-विदेशी की धूम मची रहती है। बद्रीधाम के कपाट परशुराम दर्शन गया यात्री के हाथ लगते ही खुल जाते है। यह स्थान भारतीय स्तर का पर्यटक स्थल में गिना जाता है।
  • श्री सोनाणा खेतलाजी, सारंगवास - यह स्थान महाराणा खेता के काल की स्थापना का माना जाता है।  राणा हमीर के समय यहां भैरव की पूजा का प्रावधान बन गया था। मेवाड़ के राणा से राजपुरोहित एवं चारण जाति के लोगों को जमीन देकर मर्यादा कायम की थी। जैसा कि संस्थान से 40 वर्ष पूर्व यह स्थान सामान्य पूजा स्थल व इने गिने यात्रियों जो चोटी परम्परा से कार्य पूजा से जाना जाता है।
  • इतिहास का आईना : नाडोल - यहां का वि.सं. 1029 से चौआन शासक ने राव लाखण द्वारा शासन एवं चौआन वंश का उद्भव-विकास की शाखा का उद्गम स्थान रहा है। यहां के सोमनाथ व सोमेश्वर के मंदिरों की शिल्पकला मुंह बोलती है। सोमेश्वर के मंदिरों को मुगलों ने तोड़ा तो यहीं पर अकबर के बेटे शाहजहां का एक फरमान भी मंदिर के ऊंचे भाग में पत्थर अंकित है। इस मंदिर का अनेक बार जीर्णोद्धार हुआ, उसके कलापूर्ण पत्थर इसकी दीवारों में चुने हुए है। यहां भण्डारियों का आराध्य देवी आशापुरा  का भी प्राचीन मंदिर है। जिसे जीर्णोद्धार के बाद नया स्वरूप प्रदान कर दिया है। दर्शनीय प्राचीन किला, बावडियां नगर द्वार, बुर्ज, नगर की चहदिवारी के अवशेष इसकी समृद्धि, वैभव व शिल्पकला को दर्शाती है।

 

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News & Events

  • गोडवाड़ क्षैत्र के 246 ग्रामों का ऐतिहासिक सर्वक्षण, सन् 1800 तक के षिलालेख, पांडुलिपियाँ खोज, ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर, गढ़, परकोटे, बावडियाँ, तालाब, मुर्तियाँ, ताम्रपत्र, रणक्षैत्र, लिपियाँ, अभिलेख का संकलन एवं प्रकाशन

    Tuesday, 17 February 2015 17:32
  • लेखन साहित्य-कला, धरोहर, सांस्कृतिक स्थल, षिल्प, वास्तु, म्युरल, प्रकाषन, हिन्दु-जैन व शोध लेखन का ऐतिहासिक सर्वेक्षण

    Tuesday, 17 February 2015 17:34
  • गोडवाड़ का प्रसिद्ध मंदिर निम्बो का नाथ इतिहास परख षोध वि.सं. 1637 से (महाराणा उदयसिंह) के वंषजों का इतिहास प्रकाषन हेतु मुद्रणालय में।

    Tuesday, 17 February 2015 17:35
  • गोडवाड़ ऐतिहासिक मंच द्वारा अनेक राजस्थानी भाशा विकास हेतु ऐति. लेखन, साहित्यकारों का सम्मान, जीवनी, उनके प्रेरक प्रसंग लिपिबद्ध प्रकाषन की ओर।

    Tuesday, 17 February 2015 17:35
  • आदिवासी व जन-जाति पर, गिरासियां, भील, मीणा, गाड़ोलिया, व रेबारी समाज पर प्रस्तावित सर्वे एवं लेखन कार्य

    Tuesday, 17 February 2015 17:37
  • • ‘गोडवाड़ का जानो’ सामान्य ज्ञान परीक्षा सत्र 2014 कक्षा तृतीय से महाविद्यालय स्तर तक का आयोजन।

    Sunday, 22 February 2015 13:32
  • • राजस्थान साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर द्वारा राजस्थानी रचना पाठ संगोष्ठी एवं जनकवियों का सादड़ी में आयोजन।

    Sunday, 22 February 2015 13:34
  • • महाराणा प्रताप का जन्म स्थान एवं गोडवाड़ में उनकी देन महाराणा प्रताप के वंशज गोडवाड़ क्षेत्र में विशेष संस्करण का प्रकाशन।

    Sunday, 22 February 2015 13:35
  • गोडवाड़ ऐतिहासिक मंच द्वारा अनेक राजस्थानी भाषा विकास हेतु ऐति. लेखन, साहित्यकारों का सम्मान, जीवनी, उनके प्रेरक प्रसंग लिपिबद्ध प्रकाशन की ओर।

    Sunday, 22 February 2015 13:35
  • आदिवासी व जन-जाति पर, गिरासियां, भील, मीणा, गाड़ोलिया, व रेबारी समाज पर प्रस्तावित सर्वे एवं लेखन कार्य,

    Sunday, 22 February 2015 13:36
  • राणा प्रताप की जन्म-स्थली-पाली-कुडंली एक खोज

    Sunday, 22 February 2015 13:36
  • जागृति जोत, साहित्य अकादमी, पत्रिका, दैनिक, पाक्षिक, एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं में सर्वे एवं लेखन कार्य,

    Sunday, 22 February 2015 13:37
  • मुम्बई (महाराष्ट्र) दैनिक, प्रातःकाल में गोडवाड़, गाथा, मई 2008 से लगातार प्रकाशन

    Sunday, 22 February 2015 13:37

गोडवाड़ विरासत (सांस्कृतिक, ऐतिहासिक हिन्दी मासिक पत्रिका)

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ऐतिहासिक हिन्दी मासिक पत्रिका

1970 ई. से गोडवाड़ विरासत ने अपनी मातृभूमि गोडवाड़ के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक का वारिस गोडवाड़ के लिए तत्परता निभाई। अब इसे नियमित रूप से मासिक प्रकाशन करते हुए देश के कोने-कोने में बस रहे गोडवाड़ मारवाड़ के महानुभावों तक इस पत्रिका को पहुंचाया जा रहा है।

गोडवाड़ - धार्मिक पर्यटन का पथ

गोडवाड़ प्रदेश में इतने अधिक तीर्थस्थल है ऐसा लगता है जैसे सभी देवताओं का आर्शीवाद इस भू-भाग को ही प्राप्त है। धन्य हैं यहां के वाशिंदे जहाँ प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण प्रेम न्यौछावर कर दिया और देवता भी इस पवित्र धरती का गुणगान करते है और इस धरती पर जन्म लेने के लिए लालायित हैं।

Photos of Godwad Virasat

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सम्पर्क करें

गोडवाड़ विरासत

हनुमान कालोनी, राणकपुर रोड़, सादड़ी 
तहसील-देसूरी, जिला-पाली (राज.) 306702
फोन - 02934-285135,
मो.- 9928999157, 8104747425, 9636580669

Email- info@godwadvirasat.org
Web: www.godwadvirasat.org

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