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मनमोहक है गोडवाड़ के पर्यटक स्थल PDF Print E-mail

गोडवाड़ क्षेत्र राजस्थान ही नहीं अपितु भारत एवं उत्तरी एशिया के पर्यटकों का धार्मिक पथ दर्शन।

गोडवाड़ प्रदेश में इतने अधिक तीर्थस्थल है ऐसा लगता है जैसे सभी देवताओं का आर्शीवाद इस भू-भाग को ही प्राप्त है। धन्य हैं यहां के वाशिंदे जहाँ प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण प्रेम न्यौछावर कर दिया और देवता भी इस पवित्र धरती का गुणगान करते है और इस धरती पर जन्म लेने के लिए लालायित हैं। इस धरती के पत्थर भी भगवान के रूप में पूजे जाते हैं । यहां विभिन्न सम्प्रदायों को मानने वाले लोग निवास करते हैं फिर भी यहां पर रहने वाले लोग सहिष्णुता से रहते हैं। यहां रहने वाले लोग चाहे वह हिन्दू हो, चाहे मुस्लिम या चाहे जैन हो या ईसाई सभी प्रेम और भाईचारे से रहते है और मुसीबत के समय सभी एकजुट होकर उस समस्या का समाधान करते है।

  • नारलाई- भारतीय स्तरीय जयकाल (जैकल) भगवान शिव का त्रिकूट पर्वत यहां तपेश्वर महादेव आकाश मार्ग द्वारा लाया गया मंदिर केशव तांत्रिक का बाराही माता मंदिर, आई माता धाम, भंवरगिरी गुफा जिसमें 2000 आदमी आराम से विश्राम कर सकते है। चारभुजा का मंदिर, पृथ्वीराज ग्राम जो राणा सांगा के बडे़ भ्राता द्वारा जहां खेड़ा माता का मंदिर , कई छतरियां, सती चबूतरें एवं शिव मंदिर देखने योग्य है। तीन ओर पहाडियों से घिरा कस्बा पर्वत शिमला के रूप में जाना जाता है।
  • घाणेराव- लक्ष्मीनाथ का मंदिर, नागनेचिया जी मंदिर, गुमान गुप्तेश्वर प्राकृतिक शिवालय, बद्रीनारायण मंदिर, गजानन्द रिद्धि-सिद्धि मंदिर, महादेव मंदिर कुंड़ शिवालय, चतुर्मुखी महादेव माताजी मंदिर, चामुण्ड़ा मंदिर, देलवाड़ा मंदिर 11वीं शताब्दी सुंदर कृत्रिम निर्माण कलायुक्त चारभुजा मंदिर, मीरां के मुरलीधरजी मंदिर, चारभुजा मूछाला मंदिर चैपट, झालीवाव गजानन्द व मघदत्त महादेव, महालक्ष्मी मंदिर, देवल चामुण्डा मंदिर, भेरू साईवाला मंदिर, गढ़ी माता घाणेराव, रामलक्ष्मण मंदिर, माइलीवाव महोदव मंदिर, वरेश्वर मंदिर, अन्नापूर्णा मंदिर, नालमाता मंदिर, हनुमान लक्ष्मीनारायण कुंड़ करीब 150 से अधिक मंदिरों की बहुतायत है एवं यहां देशी-विदेशी पर्यटक आते ही रहते है।
  • देसूरी- गढ़ माता, गजानन्दजी, हनुमान मंदिर, शनिमंदिर, अखाड़ा भूतनाथ मंदिर, नाममाता मंदिर, धनेश्वर महादेव, लक्ष्मीनारायण मंदिर, नृसिंह मंदिर है। गंगा मंदिर, सेली माता मंदिर, गंगाधर महादेव मंदिर, तहसील के कारण व यातायात सुविधा से देशी-विदेशी पर्यटक आते रहते है।
  • नाना - महादेव मदिर, नाथजी का अखाड़ा, गढ़ माता, चामुण्डेरी माताजी मंदिर, शिवलहर सागर प्राकृतिक, हिरोला  हटुण्ड़ी  वि.सं. 1232 का प्राचीन मंदिर कामेश्वर महादेव, पहाड़ी पर रमणीय स्थल, दांतीवाड़ा हींगलाज का मंदिर, खेडियार माताजी लुणावा, मठ, लाटारा,  बारवा, लुणावा लक्ष्मीनारायण का ब्रह्माजी का मंदिर, सरिया देवी के भव्य मंदिर जहां राजपुरोहित सुथार एवं हिन्दू संस्कृति की पूजा, भीड़ कभी मिटती ही नही।
  • बीसलपुर - आशापुरा, महादेव, भागली हिंगलाज मंदिर की भव्यता, बीजापुर हटुण्टी 8वीं शताब्दी के शिवमंदिर, मुंझा स्तुप, राता महादेव मंदिर, दूदनी जवाई नदी के मंझधार में 10 नहरें खोह का महादेव, माताजी मंदिर पुराना बेड़ा मुंझा स्थल, मादा महादेव, जवाली महादेव, सोमेश्वर महादेव मंदिर, ठा. जगतसिंह की अध्यक्षता में काफी विकास हो रहा है। साण्डेराव माताजी महादेव, भाटुन्द सूर्य मंदिर, शीतलामाता मंदिर एवं विशेष यात्रियों की भीड़ व मेले चलते है।
  • कोट - मेवाड़ सरहद अरावली के आंचल में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, राव चन्द्रसिंह ने अपने विपदा स्थल चुना था। सोलंकियों की कुलदेवी भी इसी रोड़ के दाहिनी ओर नदी के किनारे भव्य मंदिर है। 120 ग्रामों की राजधानी  कोट, कोट धूलकोट राव आसल का आसलगढ़ जो विक्रान्ताओं द्वारा रोदन, खंडहर हो गया। भगवान पार्श्वनाथ मंदिर महादेव का विशाल मंदिर भू कुंठित हो गया। राजस्थान संस्कृति का यह स्थल 8वीं शताब्दी पूर्व का पुरातन साक्षी है।

 

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News & Events

  • गोडवाड़ क्षैत्र के 246 ग्रामों का ऐतिहासिक सर्वक्षण, सन् 1800 तक के षिलालेख, पांडुलिपियाँ खोज, ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर, गढ़, परकोटे, बावडियाँ, तालाब, मुर्तियाँ, ताम्रपत्र, रणक्षैत्र, लिपियाँ, अभिलेख का संकलन एवं प्रकाशन

    Tuesday, 17 February 2015 17:32
  • लेखन साहित्य-कला, धरोहर, सांस्कृतिक स्थल, षिल्प, वास्तु, म्युरल, प्रकाषन, हिन्दु-जैन व शोध लेखन का ऐतिहासिक सर्वेक्षण

    Tuesday, 17 February 2015 17:34
  • गोडवाड़ का प्रसिद्ध मंदिर निम्बो का नाथ इतिहास परख षोध वि.सं. 1637 से (महाराणा उदयसिंह) के वंषजों का इतिहास प्रकाषन हेतु मुद्रणालय में।

    Tuesday, 17 February 2015 17:35
  • गोडवाड़ ऐतिहासिक मंच द्वारा अनेक राजस्थानी भाशा विकास हेतु ऐति. लेखन, साहित्यकारों का सम्मान, जीवनी, उनके प्रेरक प्रसंग लिपिबद्ध प्रकाषन की ओर।

    Tuesday, 17 February 2015 17:35
  • आदिवासी व जन-जाति पर, गिरासियां, भील, मीणा, गाड़ोलिया, व रेबारी समाज पर प्रस्तावित सर्वे एवं लेखन कार्य

    Tuesday, 17 February 2015 17:37
  • • ‘गोडवाड़ का जानो’ सामान्य ज्ञान परीक्षा सत्र 2014 कक्षा तृतीय से महाविद्यालय स्तर तक का आयोजन।

    Sunday, 22 February 2015 13:32
  • • राजस्थान साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर द्वारा राजस्थानी रचना पाठ संगोष्ठी एवं जनकवियों का सादड़ी में आयोजन।

    Sunday, 22 February 2015 13:34
  • • महाराणा प्रताप का जन्म स्थान एवं गोडवाड़ में उनकी देन महाराणा प्रताप के वंशज गोडवाड़ क्षेत्र में विशेष संस्करण का प्रकाशन।

    Sunday, 22 February 2015 13:35
  • गोडवाड़ ऐतिहासिक मंच द्वारा अनेक राजस्थानी भाषा विकास हेतु ऐति. लेखन, साहित्यकारों का सम्मान, जीवनी, उनके प्रेरक प्रसंग लिपिबद्ध प्रकाशन की ओर।

    Sunday, 22 February 2015 13:35
  • आदिवासी व जन-जाति पर, गिरासियां, भील, मीणा, गाड़ोलिया, व रेबारी समाज पर प्रस्तावित सर्वे एवं लेखन कार्य,

    Sunday, 22 February 2015 13:36
  • राणा प्रताप की जन्म-स्थली-पाली-कुडंली एक खोज

    Sunday, 22 February 2015 13:36
  • जागृति जोत, साहित्य अकादमी, पत्रिका, दैनिक, पाक्षिक, एवं मासिक पत्र-पत्रिकाओं में सर्वे एवं लेखन कार्य,

    Sunday, 22 February 2015 13:37
  • मुम्बई (महाराष्ट्र) दैनिक, प्रातःकाल में गोडवाड़, गाथा, मई 2008 से लगातार प्रकाशन

    Sunday, 22 February 2015 13:37

गोडवाड़ विरासत (सांस्कृतिक, ऐतिहासिक हिन्दी मासिक पत्रिका)

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ऐतिहासिक हिन्दी मासिक पत्रिका

1970 ई. से गोडवाड़ विरासत ने अपनी मातृभूमि गोडवाड़ के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक का वारिस गोडवाड़ के लिए तत्परता निभाई। अब इसे नियमित रूप से मासिक प्रकाशन करते हुए देश के कोने-कोने में बस रहे गोडवाड़ मारवाड़ के महानुभावों तक इस पत्रिका को पहुंचाया जा रहा है।

गोडवाड़ - धार्मिक पर्यटन का पथ

गोडवाड़ प्रदेश में इतने अधिक तीर्थस्थल है ऐसा लगता है जैसे सभी देवताओं का आर्शीवाद इस भू-भाग को ही प्राप्त है। धन्य हैं यहां के वाशिंदे जहाँ प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण प्रेम न्यौछावर कर दिया और देवता भी इस पवित्र धरती का गुणगान करते है और इस धरती पर जन्म लेने के लिए लालायित हैं।

Photos of Godwad Virasat

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सम्पर्क करें

गोडवाड़ विरासत

हनुमान कालोनी, राणकपुर रोड़, सादड़ी 
तहसील-देसूरी, जिला-पाली (राज.) 306702
फोन - 02934-285135,
मो.- 9928999157, 8104747425, 9636580669

Email- info@godwadvirasat.org
Web: www.godwadvirasat.org

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